Thursday, September 20, 2012

तन्हा ज़िन्दगी में यह सवाल रहने दो ।


अभी बाक़ी कुछ अपने ख़्याल रहने दो,
तन्हा ज़िन्दगी में यह सवाल रहने दो ।
तुम कहाँ चले गये बिना बताये मुझको,
तमन्ना से हसरत का विसाल रहने दो ।।

 मैं कह भी न सका तुमसे हाले-दिल,
अपने-आप से मुझे कुछ मलाल रहने दो।
यह वक़्त बीत जायेगा, बदलेगा नहीं,
घड़ी की सुइयों में अपनी चाल रहने दो ।।

दुश्मन की गोली का भी डर न रहे मुझे,
देश के लिए मेरे लहू में उबाल रहने दो ।
ईमान बेचकर रुपये कमाने वालों,
भूखे पेट के लिए रोटी-दाल रहने दो ।।

हम दोस्त न सही लेकिन दुश्मन भी नहीं,
बाहम कभी-कभार बोलचाल रहने दो ।
हर तरफ़ हंगामा है' धमाके हैं' ख़ून है,
रोते हुए बच्चों का यह हाल' रहने दो ।।

तेरी बातें सोचकर मुस्कुरा लेता हूँ ।
तुम मेरे गालों पर यह गुलाल रहने दो ।।

Friday, July 27, 2012

तनहा दिल से ये पैगाम भेजा है ...


तनहा दिल से ये पैगाम भेजा है ...
फूलों  ने  अमृत  का  जाम  भेजा  है ....
सूरज  ने   गगन  से  सलाम  भेजा  है ....
मुबारक  हो  आपको  नयी  सुबह
ऐसा मैंने आपको अरमान भेजा है ...

सच कहते है दुनिया वाले .....


वक़्त के साथ हर कोई बदल जाता है ....
गलती उसकी नहीं जो बदल जाता है ...
गलती उसकी होती है जो पहले जैसा रह जाता है ....

Sunday, July 22, 2012

Mohhabat dukh to deti hay Magar eik bat kehni hay........

Mohhabat dukh to deti hay
Magar eik bat kehni hay
Jisko chaha jata hay
Zarori ye nahi hota k
Usko pa liya jaey

Kabhi us k bicharne se
Mohabbat kam nahi hoti

Zara si dair pahle to
Yehi ehsaas hota hay K
Koi ji nahi sakta
Maggar phir rafta rafta hi
Haqiqat khul ti jati hay k
Mohabbat wo nahi hoti
K jisko pa liya jaey
Mohabbat wo b hoti hay
Jo hamesha sath rahti hay
Kabhi dukh k andheron mE
Kabhi khushion k daman mE

Kabhi wo aas dati hay
Kabhi umeed dati hay..!! rahine

Saturday, July 7, 2012

betiya ye betiya hoti hai pyari yeh betiya ....

betiya ye betiya hoti hai pyari yeh betiya 
pita ki pyari ma ki dulari 
sab ki naj hoti hai yeh betiya
sab par lutati sneh yeh betiya
risto me bharti jaan yeh betiya 
par kyu mayus ho jate hai 
betiyo ke janam par aj v log
hoti na yeh bogh 
mano na isse bogh na hai yeh kisi se kam
anmol hai yeh uphar kare uski izat 

aati hai yahi kam har muskil me
hoti na kvi paraie hamesa rahti hai juri apno se
mat samgho isse paraya
betiya yeh betiya

jindgi hoti nahi aasan .bari muskilo se hoti hai bhari

jindgi hoti nahi aasan .bari muskilo se hoti hai bhari 

in muskilo ko par karna hota nahi aasan 
hoti hai bhari chunitiyo se par hota nahi ant in chunotiyoka 
khusi shabd hota hai pyara .par
h
hota nahi aasan pana in khusiyo 
sapne jo bharte hai rang in jindgi me .par
sapne aakhir hote sapne hi hai 
pure ho nahi pate sabke
rah jate kavi tis bankar in jindgi me
jindgi ji lena hi sayad virta hai
kyuki jindi jina sabad hi samete hai jindgi ko

सोच कभी ... सोचा तो ...

सोच कभी ...
सोचा तो ...
समझा कभी ..
समझा तो ...
पढ़ा कभी ...
पढ़ा तो ...
जिया कभी ....
क्या रूप है ...
क्या अस्तित्व है ....
क्या ढंग है .....
किस रूप मे जी रहो हो .....
कैसे जी रहो हो ..
क्यूँ ढूंड रहे हो अपने आपको .......
क्या जज्बात है ...
क्या ख्य्लात है ......
कितनी जिन्दगी के और बरस आप के पास है .....
जीना है तो जी बिंदास ...
कुछ अलग तो कुछ खास .....
कुछ भी ना हो समझ ....
सब कुछ है पास .....
आज नहीं जियेगा .......
तो कल का क्या पता .....
वही चार कन्दे.....
कुछ बंदे........
राम नाम बोलेंगे ....
उठा के कुछ पल के लिए रो लेंगे ....
डाल के लकडी ....
फूँक देंगे ....
घर आयेंगे ...
कुछ खायेंगे ...
कुछ चले जायेंगे ....
फिर कुछ दिनों बाद तेरी हडियों को उठा फूल बोल सब को दिखायगे ...
और फिर गंगा मे परवाह वक़्त ....
घर के अंदर नहीं बहारसे ही ले जायंगे .....
कुछ दिनों ही तेरे नाम कि एक शोक शभा बिठा य्न्गे ....
कुछ आयंगे ...
कुछ खायंगे ...
फिर चले जायेंगे ...
फिर तू ही बता ...
तुझे क्या पता ....
कौन आया ..
कौन गया ....
तो जी ......मस्त

न कमी थी कोई जहान में कमजोर मेरा ही नशीब था

न कमी थी कोई जहान में कमजोर मेरा ही नशीब था 
सब कुछ पास था उस के | मुझे देने के लिए वो गरीब था |
उस ने बहुत धन दोलत दिया दुनिया को पर में तो एक गरीब था |

जो भी मिला उसी से मिला | ये मेरा ही नशीब था 
मेरा जनम हुआ ये भी उस के लिए बड़ा अजीब था |
कोई हंशा, कोई रोया मेरे घर का ये माहोल था 
उस वक़्त माँ का दर्द में न समझ पाया था 
पर मुझे पता है माँ के में कितना करीब था

सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो ,

सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो , 
सभी है भीड़ में जो तुम निकल सको तो चलो 
किसी के वास्ते राहें कहा बदलती है 
तुम अपने आप ख़ुद ही बदल सको तो चलो 
यहाँ किसी को कोई रास्ता नही मिलता 
मुझे गिराकर के अगर तुम सभल सको तो चलो 
यही है जिन्दगी कुछ ख्वाब चंद उमीदे 
इन्ही खिलोनो से बहल सको तो चलो

Monday, May 7, 2012

मुझे इक फूल सी बच्ची पिता कहकर बुलाती है

मुझे इक फूल सी बच्ची पिता कहकर बुलाती है
मगर माँ है मेरी अब भी मुझे बच्चा समझती है

Saturday, May 5, 2012

माटी का अपनापन .................

माटी का अपनापन .................


"मै खंडवा में पैदा हुआ अच्छा भला इन्सान था बम्बई आकर कला गीतों का व्यापारी बन गया ।मै चाहता हु की मेरे अंतिम दिन खंडवा में बीते वही की धरती पर पैदा हुआ वही पर चिता ।"ये वो शब्द है जो महान गायक किशोर कुमार जी ने अपनी वसीयत में लिखे थे ।जिनसे पता चलता है की किशोर कुमार जी को अपनी माटी से दूर रहने का कितना दुःख था और हुआ भी यही की उनकी मृत्यु के बाद उनकी चिता खंडवा में ही जली ।


इन्सान जिस माटी में खेला हो ,उसका बचपन बिता हो उससे लगाव तो होता ही है ।उस मिटटी की खुशबु हमारे बचपन ,जवानी की यादो के रूप में हो सकती है ।कभी लगता है हमारा बचपन जिस माटी में बिता है ,जहा पर हमने जीवन बिताया है वहा की माटी हमारे बचपन की छाव थी ,वो धुल भरे मोहल्ले की गलिया या गावो की गलिया और उनमे उडती धुल जब क्रांकीट के रोड नहीं होते थे तो पैरो में धुल ,कपड़ो में धुल और माथे पर धुल जैसे उस मिटटी को हमसे प्रेम हो ।उसके प्यार को हम धूल समझकर झाड़ देते थे लेकिन जब जब उस मिटटी से दूर होते है तो उस धूल का प्यार समझ में आता है ।

हमारे दर्शन में भी कुछ एसे ही कहा गया है "जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी" मतलब की जन्म देने वाली माँ और जिस भूमि पर जन्म हुआ है ये दोनों स्वर्ग से भी महान है ।हमारे गाव ,शहर ,वहा के बाज़ार सभी वो अपनापन लिए हुए एक हर्दय में स्थायी है इन्हें एक आत्मीयता रखने वाला इन्सान तो कभी भूल नहीं सकता है ।मिटटी ,घर से जुडाव किसी को भी हो सकता है उसके माध्यम अलग अलग हो सकते है ,जुडाव को महसूस करना अलग अलग हो सकता है किसी को यह जुडाव पेड़ की छाव ,बचपन के दोस्तों ,गली में आने वाले कुल्फी वाला हो या कुछ और लेकिन है तो जुडाव ही ना जो हमें महसूस होता है ।
इन्सान जन्म लेता है लेकिन उसे जीवन में जुडाव को खुद महसूस करना होता है ,आत्मीयता सारे अपनेपन का मूल आधार है ।यह अपनापन हमें जब और ज्यादा समझ में आता है जब हम अपने शहर,गाव,कस्बे से दूर होते है ।लेकिन यह अपनापन हमें सुख भी देता है जब हम कही किसी ऐसी घटना या एक ऐसे पल से हमारा वर्तमान टकरा जाता है जिसकी जड़े हमारे बचपन में या पुराने बीते हुए घर ,कस्बे में थी तब हम सोचते है क्या दिन थे ,वे क्या घर था वो ,क्या गलिया थी वो ।
यह भारत की मिटटी की विशेषता है की यहाँ के मानव हर्द्य में अपनी माटी के प्रति लगाव है ।भले ही वर्तमान में मजबूरियों के चलते जैसे नौकरी,धंधे के कारण लोगो को अपनी माटी से दूर रहना पड़े लेकिन उससे आत्मीय जुडाव हमेशा रखे ...अपने घरो की तुलना कभी उन शहरो की बड़ी इमारतो से ,उस धूल को क्रांकीट की सडको से ,उन पेड़ो को बोंसुई और मनीप्लांट से ना करे ।
आज हम देख रहे है की भारत की मानव हर्द्य की अपनेपन की आत्मीयता पर पश्चिमी सोच भारी पढने लगी है युवाओ को पैकेज और आकर्षण के कारण मिटटी की सुगंध नहीं भाती।कुछ लोगो को
महानगरीय जीवन जीने की लालसा इतनी होती है की वो उसके लिए माटी ,घर सब छोड़ने में भी कोई गुरेज नहीं करते है । धन पिपासु लोग धन के पर्याप्त होने पर भी गाव छोड़ने को शहर छोड़ने को उतावले है ।
सभी खाली उड़ना चाहते है लेकिन उस मिटटी से जुड़कर चलना कोई नहीं .........."कुछ भी भूल जाओ मित्रो लेकिन कभी अपनी माटी को मत भूलना " ।
जय भारत वर्ष ..........

Tuesday, April 24, 2012

ये प्यारा रिश्ता ही तो दोस्ती कहलाता है

चाह के भी जिससे कोई राज छुपाया नहीं जाता है
कभी हँसाता कभी रुलाता पर हर पल साथ निभाता है
खून का तो नहीं पर कभी – कभी हो जाता है उससे भी गहरा
ये प्यारा रिश्ता ही तो दोस्ती कहलाता है

Wednesday, April 18, 2012

Ek tukbandi aapki nazr hai...



"चाहते हैं अब भुला दें उसको अपने दिल से हम

प्यार करते हैं बहुत जिस हुस्ने-लाहासिल से हम

मुस्कुराहट पर किसी की, खा गए धोका 'रक़ीब'

दिल लगा बैठे किसी मगरूर से, संगदिल से हम

Saturday, April 14, 2012

वही कच्चे आमों के दिन गाँव में हैं....


  • " वही कच्चे आमों के दिन गाँव में हैं
    वही नर्म छाँवों के दिन गाँव में हैं
    मगर ये शहर की अजाब उलझनें हैं
    न तुम गाँव में हो,न हम गाँव में हैं..!! "

बस एक चुप-सी लगी है...

बस एक चुप-सी लगी है, नहीं उदास नहीं
कहीं पे साँस रुकी है, नहीं उदास नहीं

कोई अनोखी नहीं ऐसी ज़िंदगी लेकिन
मिली जो, ख़ूब मिली है, नहीं उदास नहीं

सहर भी, रात भी, दोपहर भी मिली लेकिन
हमीं ने शाम चुनी है, नहीं उदास नहीं

बस एक चुप-सी लगी है, नहीं उदास नहीं
कहीं पे साँस रुकी है, नहीं उदास नहीं।

Tuesday, April 3, 2012

कॉलेज के वो आखिरी दिन ......


कब से इंतज़ार था इस दिन का ...
राह देखि थी इस दिन की कबसे ...
आगे के सपने  सजा रखे थे न जाने कब से ...
बड़े उतावले थे यहाँ से जाने को ..
जिंदगी का अगला पड़ाव पाने को ....
पर न जाने क्यूँ दिल  में  आज   कुछ  और  आता है ,
वक़्त  को  रोकने  का  जी  चाहता  है .

जिन  बातो   को  लेकर  रोते  थे  आज  उन  पर   हंसी  आती    है  ,
न  जाने  क्यों  आज  उन  पलों  की  याद  बहुत  आती  है   .

कहा  करते  थे  …बड़ी  मुश्किल से तीन  साल सह  गए ,
पर  आज  क्यों  लगता  है  की  कुछ  पीछे रह  गया .

न  भूलनेवाली  वाली  कुछ  यादें  रह  गयी ,
यादे   जो   अब  जीने  का  सहारा  बन  गयी .

मेरी   टांग  अब  कौन  खींचा  करेगा  ,
सिर्फ   मेरा  सर  खाने  कौन  मेरा  पीछा  करेगा .
जहां  2000 का  हिसाब  नहीं  वहाँ  2 रूपए  के  लिए  कौन  लडेगा ,

कौन  रात  भर  साथ  जग  कर  पढ़ेगा  ,
कौन  मेरी  गाडी  मुझसे  पूछे  बिना ले जायेगा    ,
कौन  मेरे  नए  नए  नाम  बनाएगा .
मै   अब  बिना  मतलब  किस  से  लडूंगा ,
बिना  टोपिक्स   के  किस्से फालतू   बात  करूंगा  ,

कौन  फेल होने  पर  दिलासा  दिलाएगा ,
कौन  गलती  से  नंबर  आने  पर  गालियाँ  सुनाएगा  .

टापरी   में  चाय  किस  के  साथ  पियूंगा  ,
वो  हसीं  पल  अब  किस  के  साथ  जियूँगा ,

ऐसे  दोस्त  कहा  मिलेंगे  जो  खाई  में  भी  धक्का  दे  आयें ,
पर  फिर  तुम्हें  बचने  खुद  भी  कूद  जायें .

मेरे  गानों  से  परेशान  कौन  होगा  ,
कभी  मुझे  किसी  लड़की  से  बात   करते  देख  हैरान कौन  होगा  ,

कौन  कहेगा  साले  तेरे  जोके  पे  हंसी  नहीं  आई  ,
कौन  पीछे  से  बुला  के  कहेगा ..आगे  देख  भाई  .

मुविस   मै   किसके  साथ  देखूंगा,
किस  के  साथ  बोरिंग  लेक्टुरेस  झेलूँगा  ,

बिना  डरे  सच्ची  राय   देने  की  हिम्मत  कौन  करेगा .


अचानक  बिन  मतलब  के  किसी  को  भी  देख  कर  पागलों  की  तरह  हँसना ,
न  जाने  ये  फिर  कब  होगा  .

दोस्तों  के  लिए  प्रोफेस्सर  से  कब  लड़  पाएंगे  ,
क्या  हम  ये  फिर  कर  पाएंगे ,

रात  को  2 बजे  पोहा  खाने  स्टेशन  कौन  जायेगा  ,
तेज़  गाडी  चलने  की   शर्त  कौन  लगाएगा  .


कौन  मुझे  मेरे  काबिलियत  पर  भरोसा  दिलाएगा ,
और  ज्यादा  हवा  में  उड़ने  पर  ज़मीन  पे  लायेगा   ,

मेरी  ख़ुशी  में  सच  में  खुश  कौन  होगा  ,
मेरे  गम  में  मुझ   से  ज्यादा  दुखी  कौन  होगा …
कह  दो  दोस्तों  ये  दुबारा  कब  होगा ...

Sunday, April 1, 2012

माँ को समर्पित ....


ज़िन्दगी की तपती धुप में एक ठंडा साया पाया है मैंने...
जब खुली आँख तो अपनी माँ को मुस्कुराते  हुए पाया है मैंने  ...
जब भी माँ का नाम लिया उसका बेसुमार प्यार पाया है मैंने ...
जब कोई दर्द मह्सुश हुआ जब कोई मुश्किल आई
अपने पहलु में अपनी माँ को पाया है मैंने ...
जागती रही वो रात भर मेरे लिए जाने कितनी रातें उसे जगाया है मैंने ..
जिंदगी के हर मोड़ पर जब हुआ गुमराह मैं
इसकी हिदायात पर पकड़ ली सीधी राह  मैंने ..
जिसकी दुआ से हर मुसीबात लौट जाये ..
ऐसा फरिस्ता पाया है मैंने ...
मेरे हर फ़िक्र को जानने वाली मेरे जज्बातों को पहचाने वाली
ऐसी हस्ती पाई है मैंने ...
मेरी ज़िन्दगी सिर्फ मेरी माँ है ..
इसी के लिए तो इस जिंदगी की समां जला रखी  है मैंने ...

फूल तो फूल है कलियों पे निखार आ जाये ..


फूल  तो फूल है  कलियों पे निखार  आ जाये ..
तुम जिधर से भी गुज़र जाओ बहार आ जाये
सज सव्वर  के  कभी देखा ना करो आईना ..
ऐसा न हो की कही आईने को प्यार आ जाये

जिंदगी इसी का नाम है ...


किसी को खो कर पाने का  मजा ही कुछ और है ..
रोकर मुस्कुराने का मजा ही कुछ और है ...
हार तो जिंदगी का एक हिस्सा है  मेरे  दोस्त ...
हारने  के बाद जितने का मज़ा  ही कुछ और है दोस्तों..
जिंदगी जी तो लेते है सभी दोस्तों
पर  जिंदगी  का मतलब नहीं समझ पाते  सभी.
पूरी उम्र भी कम पड़ जाती है  इसे समझने में ..

ज़िन्दगी है छोटी, हर पल में खुश रहो ...

 ज़िन्दगी है छोटी, हर पल में खुश रहो ...
ऑफिस में खुश रहो, घर में खुश रहो ...

ჯહઔહჯ═══■■═══ჯહઔહჯ

आज पनीर नहीं है , दाल में ही खुश रहो ...
आज जिम जाने का समय नहीं , दो कदम चल के ही खुश रहो ...

ჯહઔહჯ═══■■═══ჯહઔહჯ

आज दोस्तों का साथ नहीं, टीवी देख के ही खुश रहो ...
घर जा नहीं सकते तो फ़ोन कर के ही खुश रहो ...

ჯહઔહჯ═══■■═══ჯહઔહჯ


आज कोई नाराज़ है, उसके इस अंदाज़ में भी खुश रहो ...
जिसे देख नहीं सकते उसकी आवाज़ में ही खुश रहो ...

ჯહઔહჯ═══■■═══ჯહઔહჯ

जिसे पा नहीं सकते उसकी याद में ही खुश रहो
Laptop न मिला तो क्या , Desktop में ही खुश रहो ...

ჯહઔહჯ═══■■═══ჯહઔહჯ


बिता हुआ कल जा चूका है , उसकी मीठी यादों में ही खुश रहो ...
आने वाले पल का पता नहीं ... सपनो में ही खुश रहो ...

ჯહઔહჯ═══■■═══ჯહઔહჯ


हँसते हँसते ये पल बिताएँगे, आज में ही खुश रहो
ज़िन्दगी है छोटी, हर पल में खुश रहो

आज एक बार फ़िर सुरज को उगता देखो...

आज एक बार फ़िर सुरज को उगता देखो
और चान्द को चान्दनी रात मे जागता देखो
क्या
पता कल ये धरती
चान्द और सुरज हो ना हो

आज एक बार सबसे मुस्करा 
के बात करो
बिताये हुये पलों को साथ साथ याद करो
क्या पता कल चेहरे 
को मुस्कुराना
और दिमाग को पुराने पल याद हो ना हो

आज एक बार फ़िर
पुरानी बातो मे खो जाओ
आज एक बार फ़िर पुरानी यादो मे डूब जाओ
क्या 
पता कल ये बाते
और ये यादें हो ना हो

आज एक बार मन्दिर हो आओ
पुजा
कर के प्रसाद भी चढाओ
क्या पता कल के कलयुग मे
भगवान पर लोगों की 
श्रद्धा हो ना हो

बारीश मे आज खुब भीगो
झुम झुम के बचपन की तरह 
नाचो
क्या पता बीते हुये बचपन की तरह
कल ये बारीश भी हो ना हो

आज
हर काम खूब दिल लगा कर करो
उसे तय समय से पहले पुरा करो
क्या पता आज
की तरह
कल बाजुओं मे ताकत हो ना हो

आज एक बार चैन की नीन्द सो 
जाओ
आज कोई अच्छा सा सपना भी देखो
क्या पता कल जिन्दगी मे चैन
और 
आखों मे कोई सपना हो ना हो

ये दुनिया है .. रंग तो बदलेगी ही ...


फितरत  है  दुनिया की जो  अपनी ही सुनना पसंद करते है
और दावा करते है  दूसरो को समझने  की ...
दोस्ती  में सुना है दोस्तों को समझा जाता है ..
पर यहाँ सिर्फ दोष मढ़ा जाता है ....  

I too had a love story...............

Karna hai shukriya,
ek bar apka,
jo dard ka ehsas,
apne hai karaya..

Gum hota hai kya,
milne par apke humne jana,
judai satati hai sabko,
ye bhi ab humne mana..

Ki kaisa chupate hai log,
apne ansuon ko ,
aur le ate hai chehre par,
bas ek halki muskarahat jo..

Sath reh kar bhi sabke,
akele pan ka ehsas kyu hota,
hasta hasata sabko,
magar akele mein,ye dil kyu hai rota.

Aur jagte huye,
kai raaton ko,
chahte huye bhi,
bhula na pate kuch baaton ko.

Gujarte lamho ko,
ab hum dekh lete hai,
rote hai thoda,
phir khud par has dete hai.

Ki jindagi ek bada sabak,
apne de diya,
tanhai ka jaam bhi,
ab humne pi liya..

Magar milna na phir,
humse tum kabhi,
bin apke rehna,
sikh liya hai humne abhi..

अपनी चाहत से तुम्हे निखारना चाहता हूँ......


अपनी चाहत से तुम्हे निखारना चाहता हूँ,
अपनी रंगत से तुम्हे रंगना चाहता हूँ,

बादल से तोड़ा काजल ले कर,
तेरे नैनन मे भरना चाहता हूँ,

फुलो से थोड़ी खुश्बू ले कर,
तुझे महकाना चाहता हूँ,

आसमान से एक सितारा ले कर,
तुम्हारी बिंदिया बनाना चाहता हूँ,

काली घनी घटाओ को बाँध कर,
तुम्हारे ज़ूलफे बनाना चाहता हूँ,

लहराती नदी से थोड़ी लहर ले कर,
तुम्हारा आँचल लहराना चाहता हूँ,

डूबते सूरज से थोड़ी लाली ले कर,
तुम्हारे अधरो पे सुर्खी लगाना चाहता हूँ,

ऑश की नन्ही बूँद ले कर,तुम्हारे
तुम्हारे चेहरे पे टपकाना चाहता हूँ,

ठहरे हुई झील के पानी से,
तेरा आईना बनाना चाहता हूँ,

बगिया से चमेली ले कर,
तुम्हारे लिए गज़रा बनाना चाहता हूँ,

तुम्हारे लिए कुछ संगीत चाहता हूँ,
तुम्हारे लिए कुछ गुनगुनाना चाहता हूँ,

अपनी चाहत की दुनिया मे,
तुम्हे अपना बनाना चाहता हूँ !!

एक सपना सच हो गया ....


भावनाए  जो एक बार  छिपी हुई थी  अब  आप के लिए व्यक्त की है..
दिन जो एक वक़्त डरावने  थे  आज चमकते  नीले रंग के सितारे  हैं..
समय जो एक बार बिलकुल अकेले थे  अब खुशियों से भरे है
सब कुछ जो एक वक़्त तनहा अकेले थे आज वो सारे खजाने है हमारे  पास ..
रातें जो एक वक़्त बहुत ठंडी थी  अब आरामदायक और गर्म है .
ड़र जो एक बार बहुत ही वास्तविक थे वो  तूफान के साथ चला गया...
एक दिल जो एक बार टूट गया था अब  संभल गया है ..
एक व्यक्ति जो जीवन में एक बार अकेला था अब उसे एक प्यारा सा  दोस्त मिल गया है ..
वो सपना  जिसे एक सदियों से इंतज़ार किया  अब सब सच हो रहा है.
प्यार जिसे मैंने एक वक़्त के लिए सोचा था चला गया वो अब तुम में हमेशा के लिए है.

Saturday, March 31, 2012

किस्मते रहनुमा ..


कौन कहता है आदमी अपनी किस्मत  खुद लिखता है ,
अगर ये सच है तो किस्मत में दर्द कौन लिखता है ..