Sunday, April 1, 2012

अपनी चाहत से तुम्हे निखारना चाहता हूँ......


अपनी चाहत से तुम्हे निखारना चाहता हूँ,
अपनी रंगत से तुम्हे रंगना चाहता हूँ,

बादल से तोड़ा काजल ले कर,
तेरे नैनन मे भरना चाहता हूँ,

फुलो से थोड़ी खुश्बू ले कर,
तुझे महकाना चाहता हूँ,

आसमान से एक सितारा ले कर,
तुम्हारी बिंदिया बनाना चाहता हूँ,

काली घनी घटाओ को बाँध कर,
तुम्हारे ज़ूलफे बनाना चाहता हूँ,

लहराती नदी से थोड़ी लहर ले कर,
तुम्हारा आँचल लहराना चाहता हूँ,

डूबते सूरज से थोड़ी लाली ले कर,
तुम्हारे अधरो पे सुर्खी लगाना चाहता हूँ,

ऑश की नन्ही बूँद ले कर,तुम्हारे
तुम्हारे चेहरे पे टपकाना चाहता हूँ,

ठहरे हुई झील के पानी से,
तेरा आईना बनाना चाहता हूँ,

बगिया से चमेली ले कर,
तुम्हारे लिए गज़रा बनाना चाहता हूँ,

तुम्हारे लिए कुछ संगीत चाहता हूँ,
तुम्हारे लिए कुछ गुनगुनाना चाहता हूँ,

अपनी चाहत की दुनिया मे,
तुम्हे अपना बनाना चाहता हूँ !!

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